पाषाण काल
🪨 Stone Age
📜 प्रागैतिहासिक काल | 🏺 सिन्धु घाटी से पूर्व | 🎯 परीक्षा उपयोगी
प्राचीन भारत का इतिहास — सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स
_________परिचय_________
इतिहास का वर्गीकरण
इतिहास को मुख्यतः तीन कालों में बाँटा जाता है — प्रागैतिहासिक काल, आद्य-ऐतिहासिक काल और ऐतिहासिक काल। पाषाण काल, इतिहास के सबसे प्रारम्भिक और दीर्घतम चरण का प्रतिनिधित्व करता है।
🪨 प्रागैतिहासिक काल
लिखित साक्ष्यों का सर्वथा अभाव। केवल पुरातात्विक साक्ष्य उपलब्ध। इसी में पाषाण काल आता है।
📜 आद्य-ऐतिहासिक काल
लिखित साक्ष्य उपलब्ध किन्तु अपठित। पुरातात्विक साक्ष्यों पर निर्भरता। जैसे — सिन्धु घाटी सभ्यता।
📖 ऐतिहासिक काल
लिखित साक्ष्य उपलब्ध एवं पठित। पुरातात्विक साक्ष्य भी उपलब्ध। लगभग 600 ई.पू. से प्रारम्भ।
◆ ◆ ◆
_________मुख्य विभाजन_________
पाषाण काल के तीन चरण
पाषाण काल को उपकरणों की प्रकृति के आधार पर तीन भागों में विभाजित किया गया है —
🗿 पुरापाषाण काल (Paleolithic Age)
25 लाख ई.पू. – 10,000 ई.पू.
मानव का सबसे आदिम काल। मनुष्य पूर्णतः शिकारी एवं खाद्य संग्राहक था। पशुपालन एवं कृषि का कोई ज्ञान नहीं था।
- उपकरण: हस्तकुठार (Hand Axe) सबसे प्रमुख उपकरण
- अग्नि का ज्ञान: इस काल में अग्नि एवं कृषि से पूर्णतः अनजान
- पहली खोज: 1863 ई. में पल्लवरम (मद्रास/चेन्नई) में रॉबर्ट ब्रूस फुट ने पुरापाषाण उपकरण खोजे
- पुरापाषाण उपकरण: तक्षणी एवं खुरचनी (उच्च पुरापाषाण) / फलक उपकरण क्वार्टजाइट पत्थर से (मध्य) / विशेषताएँ हस्तकुठार, खंडक, विदारिणी (पूर्व)
🏆 परीक्षा में पूछे जाने वाले तथ्य
रॉबर्ट ब्रूस फुट एक भूगर्भ-वैज्ञानिक एवं पुरातत्वविद् थे। भारत में पाषाण काल साक्ष्य की खोज का श्रेय इन्हें ही दिया जाता है।
🦣 मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
10,000 ई.पू. – 4,000 ई.पू.
संक्रमण काल — शिकार से कृषि की ओर। मानव अभी भी शिकारी एवं खाद्य संग्राहक था, किन्तु पशुपालन के प्रमाण मिलने लगे।
- साक्ष्य: पशुपालन के प्रमाण मिलते हैं
- उपकरण: अस्थि निर्मित उपकरण विशेष रूप से मिलते हैं
- प्रमुख स्थल: आदमगढ़ (मध्य प्रदेश), बागोर (राजस्थान)
- अन्य स्थल: सरायनाहर राय, महदहा (उत्तर प्रदेश)
⚠️ विशेष तथ्य
मध्यपाषाण काल को “फलक संस्कृति” भी कहा जाता है। इस काल में 14 मानव कंकाल लघनज (गुजरात) से प्राप्त हुए हैं।
🗺️ महत्वपूर्ण स्थल
भारत में मध्यपाषाण काल के विषय में सबसे पहले जानकारी बागोर (राजस्थान) से प्राप्त हुई। हड्डी से निर्मित आभूषण भी इसी काल में मिलते हैं।
🌾
नवपाषाण काल (Neolithic Age)
7,000 ई.पू. – 1,000 ई.पू.
पाषाण काल का सर्वाधिक विकसित चरण। मानव ने खाद्यान्नों का उत्पादन प्रारम्भ किया और अग्नि का प्रयोग सीखा।
- महत्वपूर्ण उपलब्धि: कृषि, पशुपालन एवं अग्नि का ज्ञान
- चावल का प्राचीनतम साक्ष्य: लहुरादेव (उत्तर प्रदेश) — 9000-7000 ई.पू.
- गेहूँ का प्राचीनतम साक्ष्य: मेहरगढ़ (पाकिस्तान) — 7000 ई.पू.
- उत्पादन के अन्य स्थल: बुर्जहोम (जम्मू-कश्मीर), संगनकल्लू, पिकलीहल, उत्तनूर
🌾 कृषि क्रांति
भारतीय उपमहाद्वीप में चावल का प्राचीनतम साक्ष्य वाला स्थल लहुरादेव है (उ.प्र.)। यह 9000–7000 ई.पू. के मध्य का है। मेहरगढ़ (पाकिस्तान) से गेहूँ की खेती का प्राचीनतम प्रमाण लगभग 7000 ई.पू. में मिलता है।
नवपाषाण काल के महत्वपूर्ण स्थल: बुर्जहोम/गुफकराल (जम्मू-कश्मीर) — यहाँ से मानव कंकाल, कुत्ते का कंकाल और गर्त आवास (Pit Dwelling) के साक्ष्य मिले हैं।
तुलनात्मक अध्ययन
तीनों कालों की तुलना
| पक्ष | पुरापाषाण | मध्यपाषाण | नवपाषाण |
|---|---|---|---|
| जीविका | शिकार + संग्रह | शिकार + पशुपालन | कृषि + पशुपालन |
| उपकरण | हस्तकुठार, खंडक | अस्थि-निर्मित उपकरण | पॉलिशदार पत्थर |
| अग्नि ज्ञान | नहीं | आंशिक | पूर्णतः उपलब्ध |
| निवास | गुफाएँ / खानाबदोश | अस्थायी | स्थायी बस्तियाँ |
| प्रमुख स्थल | पल्लवरम, सोहन | आदमगढ़, बागोर | लहुरादेव, मेहरगढ़, बुर्जहोम |
| खोजकर्ता/विशेषता | रॉबर्ट ब्रूस फुट (1863) | अस्थि-आभूषण | कुम्हार की चाक (गुफकराल) |
पुरातत्व
भारतीय पुरातत्व — महत्वपूर्ण तथ्य
🏛️
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) — Timeline
- 1861 ई. — भारतीय पुरातत्व के जनक अलेक्जेंडर कनिंघम नियुक्त, भारत में पहली बार पुरातत्व सर्वेक्षण का अनुसंधान प्रारम्भ
- 1863 ई. — भारत में पाषाण काल संबन्धी जानकारी का प्रारम्भ (रॉबर्ट ब्रूस फुट)
- 1871 ई. — पुरातत्व सर्वेक्षण एक विभाग के रूप में गठित
- 1901 ई. — लॉर्ड कर्जन के समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का नाम केन्द्रीकृत; जॉन मार्शल को महानिदेशक बनाया गया
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हड्डी की मातृदेवी
लोहदा नाला क्षेत्र (बेलन घाटी) से प्राप्त हुई — हड्डी से निर्मित मातृदेवी की प्रतिमा
🗿
वृहत्पाषाण स्मारक
मृतकों को दफनाने के स्थान। वृहत्पाषाण स्मारक की पहचान इसी से होती है।
🏛️
राष्ट्रीय मानव संग्रहालय
स्थित है — भोपाल (मध्य प्रदेश) में।
🪘
गौरिक मृद्भाण्ड
हस्तिनापुर में नामकरण हुआ। कुम्हार की चाक का अर्थ गुफकराल से मिलता है।
महत्वपूर्ण स्थल
नवपाषाण काल के प्रमुख स्थल
| स्थल | राज्य / क्षेत्र | प्रमुख साक्ष्य |
|---|---|---|
| लहुरादेव | उत्तर प्रदेश | चावल का प्राचीनतम साक्ष्य (9000-7000 ई.पू.) |
| मेहरगढ़ | पाकिस्तान (बलूचिस्तान) | गेहूँ का प्राचीनतम साक्ष्य (7000 ई.पू.), कृषि एवं पशुपालन |
| बुर्जहोम | जम्मू-कश्मीर | मानव कंकाल, कुत्ते का कंकाल, गर्त आवास |
| गुफकराल | जम्मू-कश्मीर | कुम्हार की चाक (प्राचीनतम), मकका का साक्ष्य |
| संगनकल्लू | कर्नाटक | नवपाषाण उपकरण |
| पिकलीहल | कर्नाटक | पशुपालन के साक्ष्य |
| उत्तनूर | आन्ध्र प्रदेश | नवपाषाण कालीन बस्ती |
| कोलडीहवा | उत्तर प्रदेश | चावल (Rice) का पहला साक्ष्य — मैक्सिको में भी मिला |
📍 याद रखें
नवपाषाण काल में पश्चिमी क्षेत्र में कृषि के अभ्युदय का स्थल मेहरगढ़ (बलूचिस्तान) माना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि सभ्यता का सबसे पुराना केन्द्र है।
IMP Points
विशेष महत्वपूर्ण बिन्दु
- भारत में अस्थि-पंजर का सर्वप्रथम साक्ष्य — डी. टेरा एवं पीटरसन द्वारा खोजा गया
- भारत में मध्यपाषाण काल के अंतिम चरण में पशुपालन का प्रमाण — आदमगढ़
- पाषाण-संस्कृति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक के अवशेष — मेहरगढ़
- भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य — हंथनौय (भीमबेटका) में प्रागैतिहासिक चित्रकला (शैल)
- मध्यपाषाण काल में पालतू जानवर (प्रथम) — कुत्ता
- एक ही कब्र से तीन मानव कंकाल निकले — दमदमा
- प्राचीनतम स्थायी जीवन का प्रमाण — मेहरगढ़
- मध्यपाषाण काल में 14 मानव कंकाल — लघनज (गुजरात)
- मध्यपाषाण काल में हड्डी से निर्मित आभूषण — सरायनाहर राय, महदहा
- गुफकराल का अर्थ — कुम्हार की गुफा
अभ्यास प्रश्न
MCQ Practice — SSC/UPSC स्तर
Q1. रॉबर्ट ब्रूस फुट एक ________ थे।वनस्पति-वैज्ञानिकपुरातत्वविद् व भूगर्भ-वैज्ञानिकपुरावनस्पतिशास्त्रीइतिहासकार
Q2. भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य कहाँ मिलता है?सिन्धु घाटीआदमगढ़नर्मदा घाटीबेलन घाटी
Q3. भारतीय उपमहाद्वीप में चावल का प्राचीनतम साक्ष्य कहाँ से मिला है?मेहरगढ़बुर्जहोमलहुरादेवकोलडीहवा
Q4. नवपाषाण युग में पश्चिमी क्षेत्र में कृषि के उद्भव का स्थल है?बागोरमेहरगढ़लहुरादेवआदमगढ़
Q5. ‘गुफकराल’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?पत्थर की गुफालोहे की गुफाकुम्हार की गुफाराजा की गुफा
परीक्षा से पूर्व
Quick Revision — एक नज़र में
✅ याद करने योग्य — सबसे महत्वपूर्ण
- मध्यपाषाण काल को फलक संस्कृति भी कहते हैं
- पुरापाषाण काल में उत्खनित प्रमाणों के अनुसार पशुपालन का प्रारम्भ मध्यपाषाण काल में हुआ था
- हड्डी से निर्मित आभूषण — सरायनाहर राय से
- एक ही कब्र से तीन मानव कंकाल — दमदमा
- भारत में मानव का सर्वप्रथम साक्ष्य — नर्मदा घाटी
- भारतीय उपमहाद्वीप में चावल की खेती का प्राचीनतम स्थल — लहुरादेव
- गेहूँ का प्राचीनतम साक्ष्य — मेहरगढ़ (पाकिस्तान)
- मकके का पहला साक्ष्य — गुफकराल → मैक्सिको
- भारतीय पुरातत्व के जनक — अलेक्जेंडर कनिंघम (1861)
- ASI के प्रथम महानिदेशक — जॉन मार्शल (1901)
📚 यह नोट्स SSC CGL, CHSL, MTS, UPSC Prelims, State PCS परीक्षाओं के लिए तैयार किया गया है।
स्रोत: ApnaCareer — प्राचीन भारत का इतिहास | © 2026 Study Notes
